ज्ञान किसी भी विषय को पूर्ण रूप से समझना, उसका पूरा अनुभव करना तथा समय आने पर उसका उचित तरीके से प्रयोग करना है । ज्ञान एक विश्वास है जिसे सत्य के रूप में स्वीकार किया गया है। ज्ञान बहुमूल्य रत्नों से भी महँगी चीज़ मानी जाती है जिसको कोई भी चोर चुरा नहीं सकता।ज्ञान ही एक ऐसी चीज़ है जिसके लिए किसी व्यक्ति को चिंतित नहीं होना पड़ता कि इसे कोई चुरा लेगा क्यूंकि किसी व्यक्ति का ज्ञान चुराने के लिए खुद के पास ज्ञान चाहिए। ज्ञान हर प्रकार से अर्जित किया जा सकता है चाहे वो सुनकर हो या देखकर, समझकर हो या अनुभवों से।
ज्ञान मतलब किसी भी चीज या वस्तु के बारे में सही व अच्छी जानकारी ही है।और ज्ञानी बनने के लिए जरूरी नहीं कि आप के पास कोई बड़ी - बड़ी उपाधियाँ हो या आप महंगे विद्यालयों में पढ़ें। ज्ञान किसी से भी , कहीं से भी प्राप्त हो सकता है चाहे सजीवों से प्राप्त हो या निर्जीवों से। किसी इंसान का सही ज्ञान ही उसे सफलता की राह तक लेकर जाता है।
ज्ञान- खाली बुद्धि होता है। एक जीता-जागता अनुभव, जानकारी नहीं स्वयं का अनुभव। ज्ञान का अर्थ परिचय से है, स्वयं से परिचय , दुनिया से परिचय । ज्ञान योग वह मार्ग है जहां अन्तर्दृष्टि, अभ्यास और परिचय के माध्यम से वास्तविकता की खोज की जाती है।
इसीलिए ज्ञान के मार्ग पर बहुत ईमानदार होना पड़ता है। ज्ञान का मार्ग मुश्किल है, लेकिन यह 'खुली आंखों' से चलने वाला रास्ता है। ज्ञान मार्ग पर हर कदम पर आपको ध्यान रखना है , कहाँ जाना है , क्या करना , क्या नहीं करना है । आप जानते हैं कि आप कहां पर गिरे, आप कहां तक पहुंचे।
बिना ज्ञान के, बिना सही तरह की समझ के, भावना के मार्ग पर चलते जाने से , बहुत सुंदर, सुखद, परमानन्द जैसी स्थिति लग सकती है, लेकिन यह एक सिर्फ़ ठहराव ही ला सकती है।

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